Department of Hindi

  • परिचय-

           अनुग्रह नारायण महाविद्यालय के स्थापना काल से ही हिंदी विभाग अस्तित्व में है। अपनी आरंभिक अवस्था से ही यह विभाग महाविद्यालय के उत्कृष्ट विभागों में से एक रहा है।सत्र-(1982-1984 ई.) से यहां स्नातकोत्तर की पढ़ाई हो रही है। वर्ष 2018 ई.से स्नातकोत्तर स्तर पर सी.बी.सी.एस. (चॉइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम) लागू किया गया है।इस विभाग में राष्ट्रीय स्तर के विद्वान कार्यरत रहे हैं, जिन्होंने अपनी रचनाशीलता एवं साहित्यिक गतिविधियों से विशिष्ट ख्याति अर्जित की है। वर्तमान में हिन्दी विभाग महाविद्यालय के ट्यूटोरियल ब्लॉक में स्थित है। स्नातक(प्रतिष्ठा) एवं स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम क्रमशः वर्षवार और सेमेस्टरवार पढ़ाए जा रहे हैं। विभाग के प्रोफेसरों की देखरेख में कई शोधार्थियों ने महत्वपूर्ण विषयों पर शोध-कार्य सम्पन्न किए हैं।

  • महत्व-

हिन्दी ज्ञान- विज्ञान, चेतना, संवेदना, विचार- विमर्श के साथ-साथ हमारी सभ्यता- संस्कृति, मनीषा  और  हमारे स्वाभिमान की भाषा है। भारतेन्दु हरिश्चंद्र ने ठीक ही लिखा है-

"निज भाषा उन्नति अहै,सब उन्नति को मूल।

बिनु निज भाषा-ज्ञान के,मिटत न हिय को शूल।"

हिंदी साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से व्यक्ति,समाज और राष्ट्र को निरंतर समृद्ध किया है। यथार्थ की विसंगतियों को अपनी रचनाओं के माध्यम से उजागर कर  समरस समाज के निर्माण के लिए देश की जनता को प्रेरित किया है। समाज ,राष्ट्र और मानवीय मूल्यों के प्रहरी के रूप में हिंदी साहित्यकारों का ऐतिहासिक योगदान रहा है।

भारत के संविधान ने हिंदी को कई शक्तियां प्रदान की हैं। अनुच्छेद 343(1) के अनुसार देवनागरी लिपि में लिखित हिंदी संघ की राजभाषा है। वहीं अनुच्छेद 351 के अनुसार संघ का यह कर्तव्य है कि वह हिंदी भाषा का प्रसार बढ़ाए, उसका विकास करे, जिससे यह भारत की सामासिक संस्कृति के सभी तत्वों की अभिव्यक्ति का माध्यम बन सके।

आज हिन्दी भाषा भारत में ही नहीं बल्कि दुनिया के कई देशों में बोली जाती है। फिजी, त्रिनिदाद, टोबैगो, सिंगापुर, दक्षिण अफ्रीका, बंगला देश, मॉरिशस, गयाना, सूरीनाम, नेपाल और संयुक्त अरब अमीरात में हिन्दी बोली जाती है। कनाडा आदि देशों में हिन्दी बोलने वालों की अच्छी-खासी संख्या है। इसके आलावा इंग्लैंड, अमेरिका, मध्य एशिया में भी इसे बोलने और समझने वाले अच्छे-खासे लोग हैं।

वर्तमान समय में हिन्दी के विकास में आधुनिक तकनीक का भरपूर इस्तेमाल हो रहा है। हिन्दी भाषा एवं साहित्य डिजिटल रूपों की सहायता लेकर निरंतर विकसित हो रहा है। अब कहानी, कविता के ऑडियो-वीडियो प्लेटफार्म मौजूद हैं। यूनिकोड के आगमन के बाद हिन्दी की टाइपिंग आसान हो गई है। इससे डिजिटल संदेश भेजना आसान हो गया है। ब्लॉग लेखन में हिंदी का पर्याप्त विकास हुआ है।

हिंदी भाषा और साहित्य के अध्ययन की सहायता से आज विद्यार्थी नेट /जेआरएफ, संघ लोक सेवा आयोग ,राज्य लोक सेवा आयोग एवं असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती आदि अनेक परीक्षाओं में अच्छे अंको से उत्तीर्ण हो रहे हैं।

हमारी राष्ट्रीय भाषा की लोकप्रियता और बढ़ते अंतर्राष्ट्रीय महत्व के साथ-साथ, हिंदी भाषा के क्षेत्र में रोज़गार के नए अवसरों में प्रगति हुई है। केंद्र सरकार, राज्य सरकारों (हिंदी भाषी राज्यों में) के विभिन्न विभागों में, हिंदी भाषा में काम करना अनिवार्य है। अतः केंद्र/राज्य सरकारों के विभिन्न विभागों और इकाइयों में हिंदी अधिकारी, हिंदी अनुवादक, हिंदी सहायक, प्रबंधक (राजभाषा) जैसे विभिन्न पदों की भरमार है। निजी टीवी और रेडियो चैनलों की शुरुआत और स्थापित पत्रिकाओं/ समाचार-पत्रों के हिंदी रूपान्तर आने से रोजगार के अवसरों में कई गुणा वृद्धि हुई है। हिंदी मीडिया के क्षेत्र में  संपादकों, संवाददाताओं, रिपोर्टरों, समाचार वाचक, उप-संपादकों, प्रूफ-रीडरों, रेडियो जॉकी, उद्घोषक आदि की बहुत आवश्यकता है। बहुराष्ट्रीय कंपनियां कई क्षेत्रों में हिंदी जानने वाले कर्मचारियों को वरीयता दे रही हैं। हॉलीवुड की फिल्में हिंदी में डब हो रही हैं और अनेक हिंदी फिल्में देश के बाहर देश से अधिक कमाई कर रही हैं। हिंदी विज्ञापन उद्योग की पसंदीदा भाषा बनती जा रही है।फेसबुक और व्हाट्सएप हिंदी और भारतीय भाषाओं के साथ लगातार तालमेल बिठा रहा है। सोशल मीडिया के माध्यम से हिंदी में लेखन और पत्रकारिता के नए युग का सूत्रपात हुआ है।

रोजगार, वाणिज्य ,विज्ञापन के क्षेत्र में हिन्दी का महत्व दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है।वैश्वीकरण और आर्थिक महाशक्ति के रूप में भारत के बढ़ते रूतबे के साथ आज दुनिया के कई विश्वविद्यालयों में हिन्दी पढ़ी और पढ़ाई जा रही है। आज कई देशों के विश्वविद्यालयों में ‘हिन्दी चेयर'है।

एक भाषा के तौर पर हिन्दी नित्य नई ऊंचाइयों को छू रही है और इसका भविष्य बेहद उज्ज्वल है।महाविद्यालय का हिंदी विभाग हिंदी भाषा और साहित्य के अध्ययन-अध्यापन के माध्यम से अपने विद्यार्थियों के ज्ञान-संवर्धन के साथ- साथ उन्हें एक श्रेष्ठ नागरिक बनाने के लिए  प्रतिबद्ध है,जो राष्ट्र और मानवता की सेवा कर सके।

  • उद्देश्य-
  • विद्यार्थियों में भाषा, साहित्य एवं कला में रुचि विकसित करना
  • विद्यार्थियों को ज्ञान के नवीन क्षितिजों के अन्वेषण के लिए प्रेरित करना
  • विद्यार्थियों को भारत की सांस्कृतिक बहुलता से अवगत कराना।
  • विद्यार्थियों में भाषा एवं साहित्य की रसास्वादन क्षमता का विकास करना।
  • विद्यार्थियों में सृजनशीलता का विकास करना।
  • समाज और राष्ट्र के निर्माण एवं विकास हेतु विद्यार्थियों को प्रेरित करना।
  • हिंदी साहित्य के इतिहास की विकासोन्मुख प्रवृत्ति को हिन्दी स्नातक एवं स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम समझने-समझाने में सहायक है। विभिन्न काल खंडों में विभाजित एवं नामों से सुशोभित हिंदी साहित्य का इतिहास अपने समय की सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक, और धार्मिक परिस्थितियों का यथार्थपरक ढंग से मूल्यांकन करता है, साथ ही हिंदी भाषा की विकसनशील प्रवृत्ति और व्याकरण की जानकारी से विद्यार्थियों के ज्ञान को समृद्ध करता है।
  • भाषा विज्ञान, प्रयोजनमूलक हिंदी और जनसंचार के विभिन्न साधनों के अध्ययन के माध्यम से विद्यार्थियों में रोजगार के नए अवसरों की तलाश के लिए प्रेरित करना।
  • विद्यार्थियों के मन में राष्ट्रभाषा हिंदी के प्रति सम्मान एवं प्रेम का भाव विकसित करना।
  • विद्यार्थियों में भाषा कौशल्य को विकसित करना।
  • दैनंदिन कार्य में हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देना
  • विद्यार्थियों को मानवीय मूल्यों के प्रति संवेदनशील बनाना।

 

  • अध्यापन पद्धति-
  • हिंदी विभाग के पास गुणवत्तापूर्ण और समृद्ध विभागीय पुस्तकालय है। विद्यार्थियों के हित में विभाग में अद्यतन पत्र -पत्रिकाएं भी उपलब्ध कराई जाती हैं।
  • अध्ययन-अध्यापन में पारंपरिक पद्धति के अतिरिक्त प्रोजेक्टर, कंप्यूटर तथा ऑनलाइन वर्ग संचालन आदि आधुनिक तकनीक का भी प्रयोग किया जाता है।
  • व्याख्यान , ट्यूटोरियल, निबंध लेखन प्रतियोगिता, संगोष्ठी, काव्य- पाठ, कहानी- पाठ, समूह -चर्चा, कार्यशाला एवं परियोजना कार्य के माध्यम से विद्यार्थियों की रचनात्मक क्षमता को विकसित किया जाता है।

 

  • स्वर्णिम अतीत-

प्रथम विभागाध्यक्ष डॉ.कपिलदेव सिंह, महाविद्यालय के प्रमुख संस्थापक सदस्यों में से एक रहे हैं । राष्ट्रीय ख्याति के साहित्यकार डॉ. कुमारेंद्र पारसनाथ सिंह हिंदी विभाग के शिक्षक रहे हैं। इस विभाग को सजाने संवारने में अन्य पूर्व शिक्षकों की भूमिका भी स्मरणीय है।

 

अद्यतन विभागीय  जानकारी-

 

  • विभाग में स्वीकृत पदों की संख्या- 07
  • वर्तमान में हिंदी विभाग में 5 शिक्षक कार्यरत हैं जिनका विवरण इस प्रकार है-

1. डॉ. कृष्णा सिंह, पदनाम-प्रोफेसर

2. डॉ. कलानाथ मिश्र, पदनाम-प्रोफेसर

3. डॉ. विद्या भूषण,पदनाम- सहायक प्रोफेसर

4. डॉ.भारती कुमारी, पदनाम-सहायक प्रोफेसर

5. डॉ संजय कुमार सिंह, पदनाम-व्याख्याता

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